परिचय:
आयुर्वेद में सदियों से अरनी मूल का महत्व रहा है। यहां लोक उपचार और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसके उपयोग के कुछ पारंपरिक तरीके दिए गए हैं।
घरेलू उपचार:
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वात संतुलन के लिए:
– जड़ की जड़ों से बना काढ़ा (काढ़ा) तैयार किया जाता है और इसे गर्म करके पिया जाता है। -
शक्ति और स्फूर्ति के लिए (लोकप्रिय उपयोग):
– पाउडर को शहद या दूध के साथ लें। -
दशमूल मिश्रण के लिए:
– पारंपरिक औषधियों के लिए इसे अन्य दशमूल जड़ों के साथ मिलाकर प्रयोग किया जाता है। -
सामान्य स्वास्थ्य के लिए:
आयुर्वेद के अनुसार घी में मिला हुआ जड़ का पाउडर। -
बाह्य अनुप्रयोगों के लिए:
– लोक परंपराओं में जड़ी-बूटी के तेलों के साथ जड़ का पेस्ट लगाया जाता है।
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