परिचय:
बिल्वादी चूर्ण सदियों से आयुर्वेदिक घरेलू उपचार के रूप में इस्तेमाल होता आ रहा है। यहां कुछ पारंपरिक तरीके दिए गए हैं जिनसे इसे घर पर इस्तेमाल किया जाता है।
पारंपरिक उपचार (3–5):
- दस्त/दुर्गंध के लिए
- बिलवड़ी चूर्ण को छाछ में मिला लें।
- परंपरागत रूप से दस्त को नियंत्रित करने और पाचन क्रिया को बनाए रखने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
- अपच के लिए
- भोजन के बाद गुनगुने पानी के साथ लें।
- ऐसा माना जाता है कि यह पेट फूलने और पेट की खराबी को कम करता है।
- भूख न लगने के लिए
- इसे शहद या गर्म पानी में मिलाएं।
- परंपरागत रूप से भूख बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है।
- अम्लता और गैस के लिए
- जीरा पाउडर को पानी में मिलाकर थोड़ी मात्रा में लें।
- पेट की समस्याओं से राहत पाने के लिए लोक उपचार में इसका उपयोग किया जाता है।
- सामान्य पाचन क्रिया में सहायता के लिए
- आयुर्वेद की सलाह के अनुसार नियमित रूप से कम मात्रा में लें।
- पाचन क्रिया को सुचारू और संतुलित रखने में सहायक।
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