परिचय:
धतूरे के काले बीजों का उपयोग आयुर्वेद और लोक परंपराओं में सदियों से होता आ रहा है, अधिकतर बाहरी उपयोग और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में। यहाँ कुछ पारंपरिक उपचार दिए गए हैं।
3-5 उपाय (अस्वीकरण सहित):
- जोड़ों के दर्द के लिए (बाहरी)
- सरसों के तेल में पिसे हुए बीजों को मिलाकर जोड़ों पर लगाएं।
- परंपरागत रूप से यह माना जाता है कि यह सूजन और दर्द को कम करता है।
- घावों और फोड़ों के लिए (बाहरी)
- प्रभावित क्षेत्र पर बीजों का पेस्ट लगाया जाता है।
- लोक चिकित्सा में शीघ्र उपचार के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।
- अस्थमा के लिए (पारंपरिक उपयोग)
- बीजों को थोड़ी मात्रा में सुखाकर धुएँ में पकाया जाता है।
- आयुर्वेद में इसका उल्लेख सांस लेने में आसानी के लिए किया गया है (⚠️ विशेषज्ञ की देखरेख के बिना सुरक्षित नहीं)।
- दांत दर्द के लिए (बाहरी उपचार)
- बीजों का पेस्ट बहुत थोड़ी मात्रा में मसूड़ों पर लगाया जाता है।
- दर्द से राहत पाने के लिए घरेलू उपचार।
- आध्यात्मिक अनुष्ठानों के लिए
- पूजा के दौरान भगवान शिव को अर्पित किए जाने वाले बीज।
- कई हिंदू परंपराओं में इसे पवित्र माना जाता है।
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